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सेंटर पर जी द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया इस मौके पर संगीत और संवाद का आयोजन हुआ

भागलपुर बिहार

आज दिनांक 12 जनवरी 2022 को पीस सेंटर परिधि द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया । इस मौके पर संगीत और संवाद का आयोजन हुआ ।  लाडली राज, सुषमा, उदय, कृतिका द्वारा “आ गए यहां जवा कदम, मंजिलों को ढूंढते हुए, गीत गा रहे हैं आज हम रागिनी को ढूंढते हुए” गाकर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस अवसर पर विनय कुमार भारती ने फ़ैज अहमद् फ़ैज की नज़्म “हम देखेंगे”और छुआछूत भेदभाव के विरुद्ध गीत “इंसान को अछूत और गुलाम किया हि, यह कैसा धर्म है यह कैसा कर्म है” द्वारा युवाओं के संकल्प को रखा। इस मौके पर संस्कृति कर्मी उदय ने अपनी बात रखते हुए कहा कि विवेकानंद के शिकागो धर्म संसद में दिए गए भाषण पर बहुत गर्व करते हैं । विवेकानंद ने समस्त दुनियां का दिल जीत लिया । लेकिन विवेकानंद ने जो बातें कही उसपर हम गर्व नहीं करते उसे हम नहीं मानते । अपने सम्बोधन में स्वामी जी ने बहनों और भाइयों कहा सभा स्थल तालियों से गूंज उठा । मतलब हम सभी ईश्वर की संतान हैं इसलिये आपस में बहन भाई । उन्होंने हिन्दू धर्म को सहिष्णुता की परंपरा कहा । उन्होंने ये भी कहा कि हम सभी धर्मों को सच्चा मानते हैं । स्वामी जी ने जैन बौद्ध आदि विभिन्न परंपराओं को हिन्दू धर्म का हिस्सा बताकर विविधता का सम्मान करने की बात की । उन्हें भारत में सबसे पुरानी सन्यासी परम्परा होने का गर्व था ।  आज विवेकानंद के विचारों पर हमले हो रहे हैं  सन्यासी परम्परा का मजाक उड़ाया जा रहा । सहिष्णुता के बदले नफरत आक्रामकता और हिंसा को हिन्दू होने का पर्याय बनाया जा रहा है । विवेकानंद ने कहा था इस्लामिक शरीर में  वेदांती मन ही भारतीयता ( राष्ट्रीयता / राष्ट्रवाद )  का उत्कर्ष है । सामाजिक कार्यकर्ता  सार्थक भरत ने अपने विचार में विवेकानंद को याद करते हुए बातें रखी कि  स्वामी विवेकानंद जी के विचार आज भी समाज में नितांत आवश्यक है उन्होंने कहा है कि अपनी सब प्रकार की दुर्दशा, अवनति व दु:ख के लिए हम ही जिम्मेदार हैं। यह कथन अपने आप में प्रगतिशील हैं।
स्वामी जी उस समय के भारत की पिछड़ी दशा को देख कर चिंतित होते थे उन्हें इस परिस्थिति का एक ही कारण समझ में आया कि जनता हिंदू धर्म के असली स्वरूप से अनभिज्ञ है। इसलिए उन्होंने भारतीय धर्म और साधना को ध्यान, धारण और समाधि के आदर्श को एकांत पर्वत और गुफाओं से अलग करके जनता के हित में, लोककल्याण के लिए जाग्रत किया। उन्होंने हिन्दू सवर्णों के दमन चक्र का उन्होंने पुरजोर विरोध किया था।
उन्होंने कहा था कि ‘यदि वंश परंपरा के नियमानुसार ‍सिर्फ ब्राह्मण विद्या सीखने के अधिक योग्य हैं तो उनकी शिक्षा के लिए धन व्यय न करके अस्पृश्य (अछूत जाति )जाति की शिक्षा के लिए सारा धन लगा देना चाहिए। दुर्बल की सहायता पहले करना चाहिए।  दुर्बलता के भेदभाव को छोड़कर प्रत्येक बालक-बालिका को सुना दो तथा सिखा दो कि सबल-निर्बल सभी के दिल में अनंत आत्मा विद्यमान है। अत: सभी जाति के लोग महान बन सकते हैं सभी योगी हो सकते हैं। स्वामी जी के इस उद्बोधन से स्पष्ट होता है कि वे मानव के स्वाभाविक विकास में विश्वास रखते थे। संचालन करते हुए पीस सेंटर परिधि के संयोजक राहुल ने कहा कि विवेकानंद ने जीवन भर कर्मकांड, गैर बराबरी, छुआछूत, लिंग भेद के खिलाफ आवाज उठाई ।उन्होंने पूरी धरती को अपना बंधु माना और धर्म को सच्चे अर्थ में मानने की बात की । सच्चे अर्थ में स्वामी वेकानंद ने देश को भारतीयता का अर्थ समझाया । हमें उनके समन्वय की सांस्कृतिक विचारधारा को याद करना चाहिए। आज युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने को किस प्रकार अंधविश्वास, धर्मांधता और घृणा से दूर रख राष्ट्र निर्माण में भागीदार बना सकते हैं। इस अवसर पर मनोज कुमार,चंचला देवी, रंजीत कुमार, इकराम हुसैन साद, अभिषेक कुमार, विनय कुमार भारती, कोमल श्री आदि जुड़े थे।

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