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प्रोन्नति की मांग कर रहे बीएयू के आंदोलनकारी प्राध्यापकों से मिला भाकपा-माले की टीम, किया समर्थन

बिहार

22 नवम्बर 2021, भागलपुर

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर, भागलपुर में प्रोन्नति की मांग को लेकर आंदोलनरत वैज्ञानिकों/प्राध्यापकों से मिलने भाकपा-माले की एक टीम आज विश्वविद्यालय परिसर पहुंची। टीम में भाकपा-माले के भागलपुर नगर प्रभारी व ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ-गोपगुट के जिला सचिव श्यामनंदन सिंह और ऐक्टू के जिला कार्यालय सचिव अमर कुमार शामिल रहे। टीम ने आन्दोलकारी वैज्ञानिकों/प्राध्यापकों के नेतृत्वकारी, टीचर्स एसोसिएशंस के अध्यक्ष डॉ. राम बालक प्रसाद निराला, सचिव डॉ. हिदायतुल्लाह मीर, डॉ. अभय मानकर एवं आज भूख हड़ताल पर बैठे प्राध्यापकों आदि से भेंट कर उनके कुशलता की जानकारी ली और आंदोलन के साथ एकजुटता व्यक्त कर अपना समर्थन दिया। आंदोलनकारी प्राध्यापकों के नेतृत्वकारियों ने टीम को अपनी मांगों से सम्बंधित ज्ञापन आदि की प्रति उपलब्ध करायी और बताया कि सेवा अवधि के लगभग 15 वर्ष हो गए किन्तु सहायक प्राध्यापकों को प्रोन्नति नहीं मिली। प्रोन्नति के लिए कई वर्षों से आवाज उठायी जाती रही है किंतु हमेशा मांगों को अनसुना कर दिया गया। प्रोन्नति नहीं मिलने की वजह से प्राध्यापक गहरे अवसाद से गुजर रहें हैं। शिक्षण-प्रशिक्षण, अनुसंधान आदि पर भविष्य में इसका नकारात्मक प्रभाव दिख सकता है। मांगों के प्रति विश्वविद्यालय प्रशासन की लगातार अवहेलना और टालमटोल से तंग आकर हमलोगों को आंदोलन में उतारना पड़ा। विश्विद्यालय के सभी छः महाविद्यालय व नौ रिसर्च केंद्रों के वैज्ञानिक/प्राध्यापक पिछले करीब एक महीने, 21 अक्टूबर 2021 से विभिन्न रूपों में आंदोलन चला रहें हैं। 16 नवम्बर 2021 से लगातार क्रमिक भूख हड़ताल जारी है किंतु अब भी विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया टालमटोल वाला ही है। हमने अपनी मांगों से सरकार के सम्बंधित विभाग, चांसलर, बिहार के कृषिमंत्री व मुख्यमंत्री आदि को भी अवगत कराया है पर मांगों को पूरा किए जाने की दिशा में अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। प्रोन्नति देने की सारी शक्ति विश्वविद्यालय प्रशासन के पास है किन्तु विभिन्न बहानों से उलझाकर मामले को लटकाए रखा जा रहा है और विश्वविद्यालय के शिक्षा-अनुसंधान के कार्य को अवरुद्ध कर छात्रों व कृषकों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। टीम में शामिल मुकेश मुक्त ने मौके पर कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रोन्नति जैसे सवाल के लिए भी प्राध्यापकों को आंदोलन में उतारना पड़ रहा है। बिहार में पिछले करीब 15 सालों से राज कर रही नीतीश-भाजपा की सरकार ने शैक्षणिक संस्थाओं को भी बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस सरकार के लिए सुशासन और विकास का ढिंढोरा पीटते रहने का मतलब कमीशनखोरी और सरकारी खजाने की लूट भर है। भाकपा-माले व ऐक्टू नीतीश सरकार से मांग करता है कि मामले में अविलम्ब हस्तक्षेप कर बीएयू के वैज्ञानिकों/प्राध्यापकों को प्रोन्नति का लाभ दिलाने की गारंटी करे और साथ ही बीएयू में यथाशीघ्र स्थायी वाईस चांसलर बहाल करे। टीम के श्याम नंदन सिंह ने कहा कि प्रोन्नति समय पर मिलने से मनोबल ऊंचा रहता है और कार्यक्षमता उन्नत होती है। बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ-गोपगुट आंदोलनकारियों के पक्ष में है और पुरजोर समर्थन करता है। जल्द ही मांगों की पूर्ति नहीं हुई तो महासंघ-गोपगुट बीएयू प्राध्यापकों के समर्थन में आंदोलन में उतरेगा।

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