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पीस सेंटर और राष्ट्र सेवा दल द्वारा कला केंद्र में डॉक्टर वसीम राजा की पुस्तक सूफी काव्य में संस्कृति एवं प्रेम साधना का लोकार्पण

आज दिनांक  11 दिसंबर 2021 को  पीस सेंटर और राष्ट्र सेवा दल द्वारा कला केंद्र में  डॉक्टर वसीम राजा की पुस्तक “सूफी काव्य में संस्कृति एवं प्रेम साधना” का लोकार्पण राष्ट्र सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष डॉ सुरेश खैरनार, शांतिनिकेतन की मनीषा बनर्जी, शहर के वरिष्ठ समाजकर्मी श्री रामशरण, उदय, डॉ योगेंद्र, डॉ हबीब मुर्शिद खां, मो हाजी सत्तार ने संयुक्त रूप से किया।  इस अवसर पर संगोष्ठी सांप्रदायिक राजनीति और लोकतंत्र का आयोजन हुआ। संचालन करते हुए श्री उदय ने कहा कि आज बड़ी मुश्किल से दुनिया में लोकतंत्र आया है । लोकतंत्र का मतलब है कि आम लोग गरीब, दलित, पिछड़ों के हाथ परिवर्तन की ताकत का होना। लेकिन साम्प्रदायिक राजनीति के कारण देश में आम लोगों को उनके मुद्दों और अधिकारों से वंचित किया जाता रहा है । दुनिया में टकराव का बड़ा कारण यह रहा है कि सत्ता बड़ा है या धर्म बड़ा। आम जनता के हाथ में जो यह लोकतंत्र की ताकत है उसे सांप्रदायिकता कमजोर कर रही है । क्योंकि साम्प्रदायिकता बिना काम के, बिना किसी विकास के एजेंडे के सत्ता में जीत और हार की भूमिका निभाती है । हमारे हाथ से बदलाव के औजार का छिन जाना । इसमें सबसे अधिक पिछड़े अल्पसंख्यक दलित ही भुक्तभोगी बनेंगे। राष्ट्र सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष  डॉ सुरेश खैरनार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अपने देश में  लगभग 6000 से अधिक सांस्कृतिक भिन्नता है। भागलपुर दंगे के बाद राजनीति का केंद्र बिंदु सांप्रदायिकता बन गया। यह बात लोग पहले मानने को तैयार नहीं थे लेकिन आज यह सच बन चुका है । आज महंगाई, बेरोजगारी, मानवाधिकार आदि मुद्दे गौण हो जाते हैं क्योंकि सांप्रदायिक राजनीति भारी पड़ जाता है । वरिष्ठ समाज कर्मी रामशरण ने अपनी बात रखते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र को सांप्रदायिक राजनीति ने बेईमानी बना दिया है। सांप्रदायिक राजनीति और राष्ट्रवाद दोनों साथ साथ नहीं चल सकता । शांतिनिकेतन से आई मनीषा बनर्जी ने कहां की हमारे देश में विभिन्न प्रकार के रीति-रिवाज, संस्कृति को मानने वाले लोग हैं । उसके ऊपर एक संस्कृति थोपने की कोशिश हो रही है। हाल के दिनों में देश की विभिन्न सांस्कृतिक पहचानो के बदले एक खास तरह के आक्रामक सांस्कृतिक पहचान को थोपने की कोशिश हो रही है । इसका विरोध होना चाहिए । डॉक्टर योगेंद्र ने सांप्रदायिक राजनीति  को देश के लिए  घातक बताया । देश धर्म-संप्रदाय के व्यक्तिगत मुद्दों से नहीं बल्कि आम लोगों के हितों की रक्षा करने वाले वैज्ञानिक और प्रगतिशील विचारों व कार्यक्रमों से बढ़ता है। पर इस सांप्रदायिक राजनीति ने  युवाओं  और बहुत से पढ़े लिखे लोगों के दिमाग को बदल दिया है । वे देश को आगे बढ़ाने वाले  मुद्दों को भूलकर  सांप्रदायिकता के चंगुल में फस चुके हैं । इसे तोड़ने की जरूरत है । एनुल होदा और मो. हाजी सत्तार ने गंगा जमुनी संस्कृति को और मजबूत करने पर जोर दिया। धर्म वह है जिसे हम धारण करते हैं संस्कृति सतत प्रवाहमान होती है, परिवर्तनशील होती है। संस्कृति जोड़ती है यह हमेशा लेनदेन से बनती है । इसीलिए संस्कृति प्रवाह मान है इनमें अंतर्संबंध हैं। डॉ हबीब मुर्शीद खां ने डॉक्टर वसीम रजा की पुस्तक पर कहा कि भक्ति आंदोलन, सूफी आंदोलन देश का ही नहीं बल्कि दुनिया का बहुत ही प्रगतिशील आंदोलन है। धन्यवाद देते हुए टी सेंटर के संयोजक राहुल ने कहा कि अपने लोकतंत्र की मजबूती के लिए साझी संस्कृति को मजबूत बनाना होगा । इस अवसर पर
गौतम बनर्जी, रवीन्द्र कुमार सिंह, मेघना बनर्जी, दीप प्रिया, रामपूजन, अनिरुद्ध, मनोज कुमार, जयनारायण, सार्थक भरत, अभिजीत शंकर, डॉ वसीम राजा, उमेश प्रसाद, कोमल राज, मनीषा आदि मौजूद थे।

भागलपुर बिहार
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