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निजीकरण के खिलाफ बैंक हड़ताल का ऐक्टू ने किया समर्थन …चलेगा जनअभियान

बैंक का निजीकरण एक विनाशकारी कदम, इसे रोकने की लड़ाई के साथ एकजुट हों : एम.मुक्त

15 दिसम्बर 2021, भागलपुर

बैंकों के निजीकरण के खिलाफ 16-17 दिसम्बर 2021 को दो दिवसीय बैंक हड़ताल का ऐक्टू ने पुरजोर समर्थन किया। अगले दो महीने, 20 फरवरी 2022 तक ऐक्टू बैंकों के निजीकरण के खिलाफ जनअभियान चलाएगा। उक्त निर्णय की जानकारी देते हुए ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने कहा बैंक का निजीकरण एक विनाशकारी कदम है, इसे रोकने की लड़ाई के साथ एकजुट हों। कॉरपोरेट-समर्थक कृषि कानूनों पर पीछे हटने के लिए मजबूर होने के बावजूद, मोदी सरकार आक्रामक रूप से एक अन्य प्रमुख क्षेत्र, बैंकिंग में राष्ट्रीयकरण को उलटने पर जोर दे रही है।
ऐतिहासिक बैंकों के राष्ट्रीयकरण के पांच दशक बाद, सरकार अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में न्यूनतम सरकारी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से घटाकर 26 प्रतिशत करना चाहती है। तत्काल कुछ चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पूंजीपतियों के हवाले कर देने पर आमादा है। ‘जमाकर्ता पहले’ की बयानबाजी के पीछे मोदी सरकार की बैंकिंग व्यवस्था पर औद्योगिक घरानों का कब्जा करवाने की घृणित मंशा काम कर रही है।
जमाकर्ताओं के हितों को न केवल बैंक के पतन के दुर्लभ मामलों में नुकसान होता है, बल्कि समान रूप से जब बैंकिंग आम उपयोगकर्ताओं के लिए असुरक्षित और महंगी हो जाती है और सार्वजनिक बचत के माध्यम से उत्पन्न वित्तीय संसाधनों का उपयोग निजी मुनाफे को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। इसलिए आम लोगों को बैंक के निजीकरण के विनाशकारी कदम को रोकने के लिए बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। जिस तरह किसानों ने अपने एकजुट संघर्ष और लोकप्रिय समर्थन से जीत हासिल की है, उसी तरह बैंक कर्मियों को भी निजीकरण के खिलाफ लड़ाई में और भारतीय बैंकों और वित्तीय क्षेत्र को बचाने के लिए व्यापक समर्थन और सहयोग की जरूरत है। अगले वर्ष 23-24 फरवरी को ऐक्टू सहित अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत दो दिवसीय राष्ट्रीय आम हड़ताल में भी निजीकरण पर रोक एक प्रमुख एजेंडा रहेगा।

भागलपुर बिहार

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