News

जाने दशहरा पर क्या कहती डॉ सुमन सोनी।

दशहरा या (विजयादशमी ) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को ‘विजयादशमी’ के नाम से जाना जाता है (दशहरा = दसवीं तिथि)। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा।
इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि)। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है
।आज के युग मे रावण रूपी मानव हर वर्ष जल रहा है,फिर कैसे पैदा हो रहा है।वह तो पहले से ज्यादा बढ़ रहा है।
जरूर मानव रूपी रावण को खाद -पानी किसी न किसी से मिल रहा है।
तभी तो वह आज भी हर जगह फलफूल रहा है।
डॉ सुमन सोनी का कहना है दरअसल रावण हमारे अंदर है,जो बुराइयों का एक समंदर है।आइए हम और आप विकार रूपी रावण पहचाने और उसी को सबसे पहले मारे।अंदर के विकारों के मरते ही
रावण स्वतः जल जाएगा
और फिर कभी भी उठ नही पाएगा। कहती है डॉ सुमन की उसकी जगह राम आ जाएगा ,और फिर हर जगह सच्चा और स्वस्थ,स्वक्ष दशहरा हो जाएगा।
जी डॉ सुमन कहती है कि माना जाता आ रहा है कि दशहरे पर नीलकण्ठ के दर्शन की परंपरा बरसों से जुड़ी है। लंका जीत के बाद जब भगवान राम को ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था। भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण के साथ मिलकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की एवं ब्राह्मण हत्या के पाप से खूद को मुक्त कराया। तब भगवान शिव नीलकंठ पक्षी के रुप में धरती पर पधारे थे।नीलकण्ठ अर्थात्
नीलकंठ पक्षी भगवान शिव का ही रुप है। भगवान शिव नीलकंठ पक्षी का रूप धारण कर धरती पर विचरण करते हैं। ऐसा माना जाता है।
जी डॉ सुमन सोनी का कहना है कि सच्चा दशहरा तो इसे कहते है:-
जहाँ पिता की आज्ञा पर पुत्र सिंहासन त्याग वन को चल दे वहाँ दशहरा है। जहाँ भाई भाई के आदर में कुटिया में रहकर खड़ाऊ से शासन करे वहाँ दशहरा है। जहाँ पत्नी पति के लिए सोलह श्रृंगार त्याग वैराग्य धारण कर वन को चल दे वहाँ दशहरा है। जहाँ मित्रता में मित्र को उसका खोया वैभव दिलाने के लिए मित्र जान जोखिम में डाल दे वहाँ दशहरा है। जहां देवर माँ रुपी भाभी के श्री चरणों के अलावा कईं और का निगाह बान न हो वहाँ दशहरा है।जहाँ मेरे भाई मेरे हिस्से की जमीन भी तू रखले मेरी इच्छा है कि आंगन में न दिवार उठे ये भाव हो वहाँ दशहरा है।
दशहरा महज़ विजय नहीं कर्तव्य है, मर्यादा है, त्याग है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button