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जय जवान जय किसान

❤️@जरूर पढ़िए@❤️

प्रिय साथियों प्रणाम,
क्या बताऊं हमेशा हमेशा आस लगाए बैठा रहता हूं कि चलो अब कुछ शिक्षा व्यवस्था में अच्छा होगा, चलो अब कुछ अच्छा होगा । इसी तरह इसी बीच ख्याल आ जाता है हमारे देश की विश्वविद्यालय का और इनके बारे में सोचने लगता हूं तो मुझे बहुत ही अफसोस हो रही है कि आखिर कौन लोग सरकार चला रहे हैं?

क्या सचमुच में गरीब लोग सरकार चला रही है या फिर गरीबों के आड़ में सरकार चल रही है क्योंकि जब मैं सोचता हूं की सरकार में बैठे गरीब लोग सरकार चला रही है तो फिर देश की यूनिवर्सिटी के बारे में भी सोचता हूं तो ऐसा लगता है सचमुच में यह सरकार गरीबों की आड़ में सरकार चला रही है गरीबों को बरगला करके सरकार चला रहे हैं क्योंकि एक बात याद कीजिए हमारे पूर्वजों ने अपनी ताकत और बल पर सत्ता से लड़कर टकराकर के अपना हिस्सा लिए थे जिसका परिणाम यह है कि आज हम सब छोटे से छोटे बच्चे एक अभी अभिलाषा रखने लगे हैं अपने सपनों को उड़ान भरने की और चल पडे हैं विश्वविद्यालय की ओर…..

साथियों जब मैं आज के विश्वविद्यालयों की पढ़ाई लिखे की जिक्र करता हूं और जब कुछ पूर्वजों से पता लगाता हूं कि पहले की क्या व्यवस्था थी तो सामने निकल कर आती थी उस समय के बजट के अनुसार भी यूनिवर्सिटी बेहतरीन तरीके से चलती थी। उस समय के शिक्षकों में और वहां के वाइस चांसलर में भी इमानदारी कूट-कूट कर भरी थी वह सिर्फ और सिर्फ एजुकेशन पर बात करती थी उससे सारी रिलेटेड बातें सामने ला करके अपने स्टूडेंट्स को बताते थे और कभी-कभी तो गलत के खिलाफ स्टूडेंट के साथ में रह करके आवाज भी उठाया करते थे चाहे उसको सत्ता से भी क्यों न टकराना पड़े। क्योंकि उसको उस बात की पता थी कि असली शिक्षा वही होता है जिसमें बच्चों को गलत के खिलाफ आवाज उठाना बताया जाए, उनको संघर्ष करना सिखाया जाए उन्हें देश को एकता में बांधने के लिए बताया जाए। परंतु आज मुझे तो ऐसा कुछ देखने को नहीं मिल रहा है। इसे विवशता कहीं जाए या फिर लोगों में पनप रही स्वार्थ की भावना कहीं जाए ? इसका उत्तर तो मैं आप ही पर छोड़ रहा हूं क्योंकि मैं आपकी भी राय जानना चाह जा रहा हूं।

हमारी शिक्षा व्यवस्था आज इस डिजिटल युग में भी अगर ऐसी है तो मुझे बताइए कि इतने दिनों में हमारे देश के ऐसी व्यवस्था क्यों हैं और आखिर कौन लोग इस देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने में लगे हुए ? और क्यों लगे हुए ?

आज आप सभी को समझना पड़ेगा और इनके खिलाफ लड़ना भी पड़ेगा अन्यथा आप यह सोच लीजिए कि अब आपका बच्चा वह नहीं पढ़ पाएगा जो वह चाहेगा क्योंकि सारा पढ़ाई लिखाई प्राइवेटकारण होते जा रहा है। शिक्षा को बिकाऊ बना दिया गया है, बाजारू बना दिया, आज जिसके पास जितना पैसा हो उतना शिक्षा लीजिए।

क्या हमारे बाबा साहब अंबेडकर यही कहे थे कि अमीरों को अलग शिक्षा मिलेगी और गरीबों को अलग शिक्षा मिलेगी, क्या हमारे गांधीजी ऐसे ही व्यवस्था के बारे में सपना देखते थे, क्या हमारे भगत सिंह यही सपना देख कर के अपनेंआप को कुर्बान कर दिए। अगर यही सपना देखते तो आजादी के लिए आगे कभी नहीं आते इसलिए आज हमको और आपको समझना हो और आगे की कुछ तैयारी करना होगा अन्यथा आप ऐसे गिरेंगे कभी जिंदगी में उठ नहीं पाएंगे और जिंदगी भर अपने बच्चों को पूछते रह जाएंगे कि तुम्हारी गलती है तुम्हारी गलती है परंतु ऐसा कुछ नहीं है जब आप अपने बच्चों के लिए नहीं लड़ेंगे तो बच्चे भी इसी तरह दलदल में धंसते चले जायेंगे और कुत्ता की तरह भोंकते रह जाएंगे और मिलने वाला कुछ नहीं क्योंकि यहां सिर्फ और सिर्फ गरीबी की आड़ में गरीबों पर लोग अपनी प्यार लुटा करके उसको गुलाम बना रही है ?

बताइए जब पहले गरीब लोग विश्वविद्यालय नहीं पहुंचते थे तो उस समय सब चीज विश्वविद्यालय में मौजूद थे वाइस चांसलर रहते थे उसकी सारी पदाधिकारी रहती थी अच्छी तरीके से विश्वविद्यालय चलती थी समय पर रिजल्ट देती थी समय पर परीक्षाएं होती थी और उसका कैलेंडर जारी होता था अगर किसी बैचलर डिग्री हो या मास्टर डिग्री हो उसका एक कैलेंडर होता था उस कैलेंडर के अनुसार जिसका जिस महीना में एग्जाम या जो भी असाइनमेंट या जो भी चीज प्रोग्राम में सेट किया है वह चीज अपडेट रहता था

परंतु जब से विश्वविद्यालय में गरीब छात्रों का आगमन हुआ है तब से यूनिवर्सिटी की स्थिति चिंताजनक होते जा रही है इस विषय में सभी को आज सोचने की जरूरत है कैसे एक साजिश के तहत गरीबों को बेदखल करने के लिए क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में धांधली करवाई जा रही है, लूट मचाई जा रही है यहां तक कि VC जो आते हैं वह अनाप-शनाप पैसे देकर आते हैं इससे हमारी शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ता है
अब आप ही बताइए महोदय कि जब गरीब लोग शिक्षा में अपनी हिस्सेदारी लेने लगे तो आप अभी उसको बेदखल करने के लिए तमाम तरह के प्रोपेगेंडा चला रहे हो। आप यह नौटंकी क्यों कर रहे हो इससे साफ जाहिर होता है कि आपकी मानसिकता में यही है कि गरीबों को सताओ और उसे अपने मन के अनुसार नाचाओ। जब लोग विश्वविद्यालय नहीं जाते थे तो उस समय के नौजवान साथियों ने अपनी हिस्सेदारी लिया और जब आज नौजवान यूनिवर्सिटी जाते हैं तो आज सरकार गरीब छात्रों को सताने के लिए बेबस करने के लिए बेरोजगार बनाने के लिए प्रोपेगेंडा अपना रहे हैं यह कब तक चलेगी साहब ? यह कब तक चलेगी साहब ?

दूसरी तरफ मैं देख रहा हूं आज के युवाओं में जिस प्रोपेगेंडा के साथ देश के बांटने वालों ने प्रहार किया है युवाओं पर सचमुच में वह साकार दिख रहा है हम युवाओं को जैसा बनाना चाह रहे थे जिस प्रकार से यूज करना चाह रहे थे आज वैसा ही युवा बनते जा रहे हैं मुझे बेहद अफसोस है मैं आत्मचिंतन और लोगों की सोच समझ से यह दावे के साथ कह सकता हूं कि बांटने वाले लोग गरीबी और अमीरी में बांट कर के हम और आप पर राज कर रहे हैं और हम और आप इसी तरह चुप्पी साध कर बैठे रहिए बस यही कह करके चलिए की यह मेरा काम नहीं है फलाना का काम है, चलो यह उसका काम है और इनलोगों का गुलामी करते रहिए और जो व्यक्ति ऐसे कामों में हिस्सेदारी लेता है भागीदारी सुनिश्चित करें उसको आप डेमोरलाइज करते रहिए। और एक बात यह भी है कि जो साथी gan आज सरकारी नौकरी कर रहे हैं वह भी अपने घमंड में ना रहे कि मुझे तो सरकारी नौकरी है मैं तो अपने बच्चों को पढ़ा ही लूंगा क्योंकि मैं भी भली-भांति उनको जानता हूं जो जो सरकारी नौकरी कर रहे है इसलिए अपने हक और अधिकार के लिए सोचिए अन्यथा कल आप रोने को मजबूर हो जाएंगे यही सत्य है।

लेकिन एक बात याद रखिए इससे वह व्यक्ति तो डेमोरलाइज हो सकता है लेकिन आपकी स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहेगी आप सभी को एक बात समझना होगा लोगों की जो आज शिक्षा के प्रति जागरूकता है उतना ही जागरूकता शिक्षा में गलत चीजों पर उठने वाले सवालों के प्रति नहीं है तो अब आप ही बताइए कि आप अभी सही हैं कि पहले के लोग अपनी जान निछावर कर के अपना हक दिला दिए आप इसी तरह अगर बैठेंगे तो निश्चित रूप से बांटने वाले लोग सफल होंगे और बांट कर आपको और हमको ऐसी जगह धकेल देंगे जहां से आप और हम कभी उठने की हिम्मत नहीं कर पाएंगे आज समय है उस प्रोपेगेंडा अपनाने वाले लोगों को समझने की उसे समझाने की उनकी सोच को समझ कर उसे उन्हीं सोच में जवाब देने की।
जय हिन्द जय भारत
जय जवान जय किसान
Shashi Bharti

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