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ऑल इण्डिया किसान महासभा,


19 नवम्बर 2021, भागलपुर

भागलपुर बिहार

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कॉरपोरेट परस्त – किसान विरोधी तीनों कृषि काला कानून वापस लेने की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ऑल इण्डिया किसान महासभा (एआईकेएम) के जिला सचिव बिन्देश्वरी मंडल ने कहा कि किसान संगठन और देश के किसान उचित संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा करेंगे। वर्तमान भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री की जो कार्यशैली रही है उसे देखते हुए उनकी नियत और बदलते रुख पर भरोषा करना देश के किसानों के लिए मुश्किल होगा किन्तु अगर ऐसा होता है, तो यह भारत में एक वर्ष से चल रहे किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत होगी। हालांकि, इस संघर्ष में करीब 700 किसान शहीद हुए हैं। लखीमपुर खीरी हत्याकांड समेत, इन टाली जा सकने वाली मौतों के लिए केंद्र सरकार की जिद जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जून 2020 में पहली बार अध्यादेश के रूप में लाए गए सभी तीनों किसान विरोधी कारपोरेट परस्त कानूनों को निरस्त करने की घोषणा आज गुरु नानक दिवस के अवसर पर किया है हम इसे संयुक्त किसान संघर्ष की जीत मांनते हैं 1 बरस से दिल्ली में चल रहे संयुक्त किसान संघर्षों के सामने प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा है, हम प्रधानमंत्री को यह भी याद दिलाना चाहेंगे की हमारी मांगे सिर्फ तीन काले कानूनों को निरस्त करने भर नहीं था बल्कि सभी कृषि उत्पादों और सभी किसानों के लिए लाभकारी मूल्य यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य सीटू प्लस 50% की कानूनी गारंटी की भी मांग थी , साथ ही बिजली संशोधन विधेयक 2020 को वापस लेने लखीमपुर खीरी के हत्याकांड के मुख्य आरोपी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की भी मांग है। वहीं ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों के संघर्ष के आगे घुटना टेका हैं। यह किसानों के नीचे गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक निरंतरता में संघर्ष की एक बड़ी जीत है किन्तु किसान-मजदूर विरोधी भाजपा सरकार के खात्मे तक मजदूरों-किसानों का संयुक्त संघर्ष जारी रहेगा। तीनों कृषि काले कानून की तरह ही मोदी सत्कार 4 लेबर कोड और अन्य जन विरोधी कानूनों को वापस लेना होगा। देश का मजदूर वर्ग किसान आंदोलन से प्रेरणा ग्रहण करते हुए अपने हक अधिकार की लड़ाई को और मजबूत करेगा।

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