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अंगिका साहित्यकारों के महाकुंभ के बीच ” गंग मैना ” का हुआ लोकार्पण

मौजूद अंगिका साहित्यकारों व कवि त्रिलोकी के परिजनों ने लोकार्पित पुस्तक को खूब सराहा

भागलपुर : साहित्य की मूल भूमिका अपने समय और समाज की प्रतिगामी रूढियों, परम्पराओं और बुराइयों का प्रतिरोध करना है.साहित्य यह काम सचेत रूप से नहीं बल्कि स्वाभाविक रूप से करता है; पर ऐसा लगता है कि इधर साहित्य अपने सामाजिक दायित्व का निर्वाह नहीं कर पा रहा है.समाज की रूढियों का विरोध करने की जगह अब वह लगभग उनका वाहक बनता जा रहा है.यानी हमारे सामाजिक-राजनीतिक वातावरण में जो पतनशील प्रवृत्तियां हावी हैं,वे साहित्यिक परिवेश का भी स्थाई अंग बनती जा रही हैं.बाजार और बाजारवादी प्रवृत्ति का कारगर प्रतिरोध करने की जगह साहित्य का क्षेत्र स्वयं बाजार के नियमों से संचालित होने लगा है.इसका सबसे सटीक उदाहरण दुनियां की प्राचीन और अंग प्रदेश की लोकभाषा अंगिका में तीव्रता से फल-फूल रही पुस्तक लोकार्पण की संस्कृति है.
उक्त बातें रविवार को स्थानीय भगवान पुस्तकालय में लगे अखिल भारतीय अंगिका साहित्य कला मंच के नेतृत्व में अंगिका साहित्यकारों व प्रेमियों के महाकुंभ के बीच कवि त्रिलोकीनाथ दिवाकर के स्वरचित अंगिका गीत-गजल संग्रह “गंगमैना”पुस्तक के लोकार्पण उत्सव को संबोधित करते हुए समारोह के मुख्य अतिथि डाॅ.योगेन्द्र ने कही.उन्होंने कहा कि वे वर्षों पूर्व से कई बार मंच से त्रिलोकीनाथ दिवाकर की कविता सुनकर उनकी भंगिमा,लय और स्वर पर मुग्ध होते रहे हैं.उन्होंने कहा कि गंगमैना गंगा किनारे बसती है.
आयोजित लोकार्पण उत्सव में उदघाटनकर्ता के रुप में मौजूद टीएमबीयू के प्रोक्टर प्रो.(डाॅ.) रतन मंडल ने कवि त्रिलोकीनाथ दिवाकर के इस लोकार्पित पुस्तक गंगमैना की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस पुस्तक में मौजूद काब्य आधुनिक घटनाक्रम पर तीखा प्रहार है.उन्होंने इसी तरह कवि त्रिलोकीनाथ दिवाकर को काब्य सृजन की दिशा में कलम चलाने और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की और कहा कि अंगिका केवल भाषा नहीं बल्कि यह उस सभ्यता और संस्कृति का परिचायक है,जो कई भाषाओं की जननी है.
इस लोकार्पण उत्सव समारोह में मौजूद हिन्दी अंगिका के लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार डाॅ.अमरेंद्र ने कहा कि ‘गंगमैना’ सिर्फ गंगमैना नहीं बल्कि यह गंगोत्री समुदाय के लिए उनके समृद्ध इतिहास को समेटे एक समृद्ध लोकोक्ति है और यह लोकोक्ति ही गंगोत्री समुदाय के जीवन और संस्कृति को समझने के लिए काफी है.
इससे पहले इस लोकार्पण उत्सव की शुरुआत साज-साज के साथ स्वागत गान और अंग प्रदेश के चर्चित गीतकार राजकुमार के मधुर कंठ से मंचीय कुलगीत से आरंभ हुआ.तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों अध्यक्ष डाॅ.मधुसूदन झा,उदघाटन कर्ता प्रो.रतन मंडल,मुख्य अतिथि डाॅ.योगेन्द्र,स्वागताध्यक्ष प्रो.आनंद झा बल्लो,विशिष्ट अतिथि हीरा प्रसाद हरेंद्र,कथाकार रामकिशोर, कुलगीतकार आमोद कुमार मिश्र,मंच के बिहार‌ प्रदेश सचिव सुधीर कुमार सिंह प्रोग्रामर,डाॅ.ब्रह्मदेव नारायण सत्यम,संचालक जयकृष्ण कुमार को अंग वस्त्र भेंट कर उनका माल्यार्पण करते हुए उनका स्वागत किया गया.इस मौके पर मंच की ओर से कवि त्रिलोकीनाथ दिवाकर भी सम्मानित हुए. मौके पर मौजूद स्वागताध्यक्ष डाॅ आनंद झा बल्लो ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी और साहित्य ऋषियों का दर्शन पाकर वे गौरवान्वित महसूस करते हैं.
लोकार्पित पुस्तक गंगमैना के कवि/लेखक त्रिलोकीनाथ दिवाकर ने इस पुस्तक को अपनी परमपुज्य मां श्रीमती उर्मिला भारती और परमपूज्य पिता श्रद्धेय दिवंगत जयराम मंडल को समर्पित करते हुए कहा कि आज वे जो कुछ भी कर पा रहे हैं,वह अपने माता-पिता व बड़े भाई रामकृष्ण भारती के आशीर्वाद का सुखद परिणाम के बदौलत है.उन्होंने कहा कि अंगिका उनके प्राण में बसते हैं,इसका उन्हें सदैव गर्व रहा है.
कवि/गजलकार सुधीर कुमार सिंह प्रोग्रामर ने कवि त्रिलोकीनाथ दिवाकर को सिद्धस्त और एक मांझा हुआ मंचीय कवि बताया और कहा कि इनकी गंगमैना काब्य की पहली फूल है और इस फूल की महक आज अंगप्रदेश के कोने-कोने में चहकती़ हुई दिख रही है.हीरा प्रसाद हरेंद्र ने कवि त्रिलोकीनाथ दिवाकर को काब्य का जादुगर बताते हुए कहा कि इनकी प्रस्तुती श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है.अश्वनी प्रजावंशी ने कवि त्रिलोकीनाथ दिवाकर को अंग प्रदेश का गौरव बताया तो वहीं युवा कवि मंजीत सिंह किनवार व कुमार गौरव ने उन्हें अपना प्रेरणास्रोत बताया.साथी सुरेश सूर्य ने कहा कि गंगमैना कवि त्रिलोकीनाथ के व्यक्तित्व को प्रमाणित करता है.
मौके पर मौजूद कवि त्रिलोकीनाथ दिवाकर के बड़े भाई रामकृष्ण भारती ने कहा कि बाल्यावस्था से ही मेघावी रहे उनके अनूज ने आज़ अपने पुरे कूनबे का सिर गर्व से ऊंचा कर दिखाया है. वहीं उत्सव समारोह को संबोधित करते हुए दयानंद जायसवाल,महेन्द्र मयंक,ब्रह्मदेव नारायण सत्यम,फुलकुमार अकेला,लक्ष्मी नारायण मधुलक्ष्मी,गीतकार राजकुमार,विकास गुलटी,डाॅ.जयंत जलद‌ आदि ने कवि त्रिलोकीनाथ द्वारा रचित गंगमैना को काफी सराहा और कहा कि इसकी गूंज अंग प्रदेश के साहित्य को चार चांद लगाएगा.
वहीं अपने अध्यक्षीय उदगार में डाॅ.मधुसूदन झा ने कहा कि त्रिलोकीनाथ दिवाकर ने साहित्य और समाज को हमेशा मार्गदर्शित किया है.अपनी लेखनी से समाज व राजनीति के काले सच को लोगों के सामने लेकर आने वाले त्रिलोकीनाथ दिवाकर ने आज अंग प्रदेशवासियों के समक्ष गंगमैना को प्रस्तुत कर यह साबित कर दिया है कि,अंग प्रदेश में भी बाबा नागार्जुन और फणीश्वरनाथ रेणु जैसे काब्य ऋषी मुनी मौजूद हैं.उन्होंने वर्तमान साहित्यकारों को समाज के बारे में सोचकर रचना करने की सलाह दी और कहा कि त्रिलोकी नाथ दिवाकर साहित्य जगत के वीर योद्धा हैं. उन्होंने श्री दिवाकर की रचनाओं का मूल्यांकन कर उसे लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि अंगिका भाषा में एक से बढ़कर एक कवि व योद्धा होने के बावजूद आज इस भाषा को अपने समुचित सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है इसलिए हम सभी को इसके उत्थान के लिए आगे आना होगा.
इस मौके पर कपिलदेव कृपाला,प्रीतम विश्वकर्मा,अलबेला जी, महेन्द्र निशाकर,सत्येन भास्कर,सुबोध मंडल,कैलाश ठाकुर,मनीष गूंज,भोला बागवानी सहित सैकडो़ं अंगिकाप्रेमी मौजूद थे.

फोटो : अंगिका गीत-गज़ल संग्रह की पुस्तक गंगमैना का लोकार्पण करते हुए मंचासीन अतिथिगण

भागलपुर बिहार

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